Saturday, May 26, 2012

सीढियां


जो ऊपर की ओर जाती हैं,
वही सीढियां नीचे भी आती हैं.
और सीढियां चढ़ने-उतरने की
कई विधाएं भी पायी जाती हैं!

कुछ लोग एक-एक कदम बढ़ाते हैं,
कुछ लोग बस फांदते ही जाते हैं.
और कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो
हर सीढ़ी पर दोनों कदम जमाते हैं.

और वैसे ही उतरना भी कला है.
धीरे-धीरे उतरना बेहतर होता है,
क्यूंकि जल्दी-जल्दी उतरने में
लड़खड़ाने का ख़तरा ज्यादा होता है.

बात तो बस रिस्क की है,
कौन कितना उठा पाता है.
जो जितना रिस्क उठाता है
वो उतना ही बढ़ता जाता है.

लेकिन चढ़ने और उतरने के क्रम में
एक विशेष अंतर होता है,
कि कूदकर उतरना तो आसान होता है
मगर उछलकर चढ़ पाना-
ज़रा मुश्किल होता है !



Picture Courtesy: http://wellness-nexus.blogspot.com/2012/03/climb-steers-of-success.html

21 comments:

  1. अच्छा चिंतन किया ...!!
    सुंदेर भावों मे पिरोये मन के भाव ...!!समझ मे आ रहा है आप सीढ़ी चढ़ना जानते है ...!!:)
    शुभकामनायें मधुरेश ...!!

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  2. सीढ़ी चढ़ना भी एक कला है...
    रिस्क लेना अच्छी बात है...
    कदम जमाकर चलना उससे भी अच्छी बात है...
    गहन विचारों को प्रेषित करती रचना बहुत पसंद आई !

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  3. लेकिन चढ़ने और उतरने के क्रम में
    एक विशेष अंतर होता है,
    कि कूदकर उतरना तो आसान होता है
    मगर उछलकर चढ़ पाना-
    ज़रा मुश्किल होता है !
    एक पल कहते हो परिपक्वता के तलाश में हो ....
    अगले पल अपने कहे को ही कसौटी पर डाल देते हो ....
    और मेरी उलझन और उलझन में पड़ जाती है ....

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  4. लेकिन चढ़ने और उतरने के क्रम में
    एक विशेष अंतर होता है,
    कि कूदकर उतरना तो आसान होता है
    मगर उछलकर चढ़ पाना-
    ज़रा मुश्किल होता है !... कहाँ उतरना है कूदकर , कहाँ आहिस्ते कहाँ चढ़ना है पलक झपकते ..... यह सीधी सांप सीढ़ी सा ही होता है

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  5. कूदकर उतरना तो आसान होता है
    मगर उछलकर चढ़ पाना-
    ज़रा मुश्किल होता है !
    .....सुन्दर अभिव्यक्ति
    growth is often bit by bit whereas the process of decline is much more rapid
    exquisite manifestation madhuresh bhai

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  6. लेकिन चढ़ने और उतरने के क्रम में
    एक विशेष अंतर होता है,
    कि कूदकर उतरना तो आसान होता है
    मगर उछलकर चढ़ पाना-
    ज़रा मुश्किल होता है

    बहुत सुंदर अपने भावों की प्रस्तुति,,,,,,,,

    MY RECENT POST,,,,,काव्यान्जलि,,,,,सुनहरा कल,,,,,

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  7. बात तो बस रिस्क की है,
    कौन कितना उठा पाता है.
    जो जितना रिस्क उठाता है
    वो उतना ही बढ़ता जाता है.

    सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट कबीर पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  8. बहुत ही गहरे और सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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  9. bahut hi badhia poem
    thanks
    http://drivingwithpen.blogspot.in/

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  10. बहुत ही अच्‍छा तालमेल शब्‍दों में चढ़ने और
    उतरने के क्रम का ... बेहतरीन

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  11. चढ़ने उतरने की कला कों बखूबी बाँधा है .. जीवन भी ऐसे ही ऊपर चढा जाए तो सफल रहता है ...

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  12. कोई चढ़ जाता है तो कोई उतर जाता है

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  13. कल 29/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. आभार विभा मौसी और यशवंत भाई! :)

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  14. अच्छी तरह अंतर समझा दिया है .. बहुत अच्छी लगी..वाह!

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  15. लेकिन चढ़ने और उतरने के क्रम में
    एक विशेष अंतर होता है,
    कि कूदकर उतरना तो आसान होता है
    मगर उछलकर चढ़ पाना-
    ज़रा मुश्किल होता है !
    bahut hi gahri abhivyakti !

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  16. क्या बात कही है मधुरेश जी... सच में यह एक कला है...आगे बढती सीढियों के उंचाई और चौड़ाई का सही अनुपात लगाकर सही सीढ़ी पर कदम रखना वाकई मुश्किल होता है...मुझे तो वाकई में अब भी सीढ़ी पे उतरने और चढ़ने में कठिनाई होती है...जिंदगी की सीढ़ी तो पता नहीं कैसे चढ़ी जा रही हूँ या उतरी जा रही हूँ...बहुत हीं सुन्दर रचना....:)

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  17. बहुत ही अच्छी बात कही है....
    सीडिया चड़ने और उतरने में धैर्य बनाये रखना है..
    पैर जमाये रखना है..
    बेहतरीन रचना...

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  18. बहुत सहजता से एक गूढ़ बात कह दी ......KUDOS!!!!

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  19. सीढि़यां चढ़ने से आपकी जिंदगी स्वस्थ रहती है और आप कुछ और अच्छे दिन अपनी लाइफ में जोड़ सकते है। इससे कई प्रकार के हेल्थ़ रिस्कग भी कम हो जाते है। https://goo.gl/6Np8cq

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