Thursday, March 22, 2012

मधुशाला तुम पे लिख डालूँ





इक सुन्दर, श्रृंगार की कविता
दिल करता तुम पे लिख डालूँ.
कुछ शब्द संजोऊँ मीठे से,
मधुशाला तुम पे लिख डालूँ.

पलकें जब उठती-गिरती हैं
खाली प्याला भर जाता है,
तुम्हे देख-देख ही नयनो में
पुरज़ोर नशा चढ़ जाता है.

किन शब्दों से मुख के रज का
करूँ वर्णन मैं इस नीरज का!
मन रजनि पा तुम सा मयंक,
बस तृप्त-तृप्त हो जाता है.

मुस्कान मृदुल मनमोहक जब
बनकर कुसुम मुख पर खिलती,
जी करता उनको चुन-चुन कर
इक माला उनकी गढ़ डालूँ.

कुछ शब्द संजोऊँ मीठे से,
मधुशाला तुम पे लिख डालूँ.

Picture Courtesy:Priyadarshi Ranjan

Dedicated to Abhishek Bhaiya and Bhabhi :) Wedding gift :)

P S : 'बच्चन' की 'मधुशाला' से इन पंक्तियों का न तो कोई सरोकार है, न ही तुलना की जा सकती है.... पाठकगण से अनुरोध है की इसे simply  एक श्रृंगार की कविता के तौर पर पढ़ें. आभार!

39 comments:

  1. सुंदर शाब्दिक संयोजन ....बहुत बढ़िया रचना

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  2. सुन्दर प्रस्तुति ।

    नवसंवत्सर की शुभकामनायें ।।

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  3. बहुत सुन्दर.........
    इससे बेहतर तोहफा कुछ हो नहीं सकता...
    मधुरेश की मधु में डूबी मधुशाला....

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  4. Really very nice, bhavon se bhari madhushala(kavita)

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  5. कुछ शब्द संजोऊँ मीठे से,
    मधुशाला तुम पे लिख डालूँ.

    Bahut khobb...

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  6. मधुशाला है इक नशा या जीवन है
    इसको पहले जान लो फिर लिखना मधुशाला...

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  7. अनुपम भाव संयोजन लिए ...बेहतरीन पंक्तियां

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  8. क्या बात है...बहुत खूब सर!


    सादर

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  9. आपको नव संवत्सर 2069 की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ----------------------------
    कल 24/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. हलचल में शामिल करने के लिए बहुत धन्यवाद यशवंत जी!
      नव-वर्ष की आपको भी बहुत बहुत शुभकामनाएं!

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  10. बहुत खूबसूरत मधुशाला

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  11. Replies
    1. धन्यवाद, सुमित जी.
      मधुशाला में आपका स्वागत है.
      सादर

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  12. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति!

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  13. बहुत सुन्दर रचना ----------धन्यवाद

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    1. धन्यवाद, संध्या जी.
      मधुशाला में आपका स्वागत है.
      सादर

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  14. सप्रथम में शीर्षक पढ़के मुग्ध हो गया I
    सब्दो को प्रबुधता के साथ बुना गया है जो की वर्णनीय है I
    इति में मेरे चित्र का मान बढ़ने के लिए धन्यबाद I

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  15. Replies
    1. धन्यवाद, रोशी जी.
      मधुशाला में आपका स्वागत है.
      सादर

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  16. Replies
    1. धन्यवाद, क्षितिजा जी.
      मधुशाला में आपका स्वागत है.
      सादर

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  17. ab nahi rahe wo peene wale .. aab nahi rahi wo madhushala :)

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  18. Replies
    1. धन्यवाद, पूनम जी.
      मधुशाला में आपका स्वागत है.
      सादर

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  19. पलकें जब उठती-गिरती हैं
    खाली प्याला भर जाता है,
    तुम्हे देख-देख ही नयनो में
    पुरज़ोर नशा चढ़ जाता है.


    वाकई मधुशाला लिख सकते हैं आप ....बहुत सुन्दर गीत

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  20. कुछ शब्द संजोऊँ मीठे से,
    मधुशाला तुम पे लिख डालूँwaah very nice.......

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  21. सुन्दर गीत....
    नवसंवत्सर की हार्दिक बधाई...

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  22. मदहोशी बिखेरती हुई सुन्दर रचना..

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  23. बहुत ही सुन्दर में आपके ब्लॉग पे पहली बार आया हु
    लेकिन आगे आता रहूँगा
    मेरे ब्लॉग पे भी आप आएंगे तो हमें अच्छा लगेगा
    http://vangaydinesh.blogspot.in/

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  24. इक सुन्दर, श्रृंगार की कविता
    दिल करता तुम पे लिख डालूँ.
    कुछ शब्द संजोऊँ मीठे से,
    मधुशाला तुम पे लिख डालूँ.

    वाह ! सुन्दर अहसास ...और क्या चाहेगी एक प्रेयसी !!!!

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  25. बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति । मेरे पोस्ट पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।.

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  26. पलकें जब उठती-गिरती हैं
    खाली प्याला भर जाता है,
    तुम्हे देख-देख ही नयनो में
    पुरज़ोर नशा चढ़ जाता है....

    प्रेम की मधुर अभिव्यक्ति ... मज़ा आ गया पढ़ के ...

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  27. पलकें जब उठती-गिरती हैं
    खाली प्याला भर जाता है,
    तुम्हे देख-देख ही नयनो में
    पुरज़ोर नशा चढ़ जाता है.

    :)

    सुंदर ! अति सुंदर !!


    # गीत का विस्तार किया हो तो लिंक भेजें बंधु !


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  28. बहुत ही मधुर ....मधु सी मधुशाला .....मीठे शब्दों को ही नही बहावो को संजोती आपकी ये रचना .....

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  29. आपकी मधुशाला भी बहुत खूबसूरत है. बधाई

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