Monday, January 16, 2012

योर हिंदी वाज़ कूल: A generation that was!


क्या आपको लगता है,
यूँही निकल आते हैं
किसी में हिंदी के पर?
हैरत न होगा जो कहूँ
कि हिंदी का सागर है
हमारा प्यारा घर!

बड़े ही प्रेम से पुत्र-पुत्र कहकर
पुकारती हैं मुझे,
मेरी ही माताश्री!
और मेरी नटखट शरारती बहने भी
कहती हैं मुझे
प्यारे 'भ्राताश्री'!

त्रेता औ' द्वापर की कहानियां
दूरदर्शन से भले ही बीत हो गयीं,
रामायण औ' महाभारत की परन्तु
हमारे घर में सदा की रीत हो गयी!

नानाजी को नमस्कार करते ही
उनके मुखसे 'चिरंजीवी भव:'
के शब्द निकलते थे!
और भीष्म ने क्या दी होगी
जितनी शिक्षा हमारे पितामह
स्वयं ही दिया करते थे!

पिताश्री स्वयं ही
काव्य के महासागर हैं,
और मेरे अनुज भी
शेर-ओ-शायरी में
उदीयमान तारावर हैं!


लोग कहते हैं तुम्हारी हिंदी ही
भला क्या कोई कम है !
सीधे-सीधे क्यूँ नहीं कहते कि
कमबख्त खानदानी प्रॉब्लम है!

अब कहिये इतने शब्दों का
बोझ मैं कब तक ढ़ोऊँ?
क्यूँ ना अपनी रचनाओं से
हिंदी के कुछ नए बीज बोऊँ?

इल्म है मुझे कि मेरी संतानें जब
बरसो बाद इन पौधों को देखेंगी,
पढ़ेंगी कितना पता नहीं, पर
'योर हिंदी वाज़ कूल' अवश्य कहेंगी!




Picture Courtesy: http://www.shutterstock.com/pic-47631088/stock-vector-cartoon-family-portrait.html

13 comments:

  1. hindi sach me nirali hai,
    shabdo ka jadu poochhiye mat

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  2. hindi mein jo baat hai
    hriday mein sama jati hai l
    apki rachna padke
    hindi mein apki abhiruchi
    sarahniya lagti hai!!

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  3. अब कहिये इतने शब्दों का
    बोझ मैं कब तक ढ़ोऊँ?
    क्यूँ ना अपनी रचनाओं से
    हिंदी के कुछ नए बीज बोऊँ?

    बहुत सुन्दर ... वाकई योर हिंदी इज़ कूल ..

    आपकी कई रचनाएँ पढ़ीं .. बहुत अच्छा लिखते हैं ..आपके ब्लॉग का पता चला मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन से .. आभार


    कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  4. Aise hi likhte raho..
    aur hindi ke naye naye beej bote raho

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  5. Hindi to apni life h....

    u r heartily invited to my Blog

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  6. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 19- 01 -20 12 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज... जिंदगी ऐसे भी जी ही जाती है .

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  7. यहाँ मेरी पहली टिप्पणी नहीं दिखाई दे रही है ..वार्ड वैरिफिकेशन हटाने की गुजारिश की थी

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  8. संगीता स्वरुप जी, अनुशंषा के लिए धन्यवाद!
    मेरी 'मधुशाला' में आपका हार्दिक स्वागत है!

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  9. बहुत बढ़िया,
    बड़ी खूबसूरती से कही अपनी बात आपने.....

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  10. एकदम अलग सी कविता...बहुत अच्छी लगी...और बेहद 'कूल' भी :)

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  11. बहुत बहुत प्यारी रचना है...
    आपने कलम उठाई है तो आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर तो निर्मित हो ही रहा है प्रतिपल!
    ढ़ेर सारा स्नेह, आशीष एवं शुभकामनाएं!

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