Saturday, August 2, 2014

प्रेम-पाती



मन की अवनि पर धूप खिला,
नव जीवन को आधार मिला,
बीता तम घन, बीती रातें,
जब प्रीत मिला, मनमीत मिला।

नव-स्वप्नों का अम्बार लिए,
जीवन स्वागत हेतु आई,
खुशबू बिखरी चहु ओर दिशा,
सुमनों की बरखा कर लाई।

जीवन कोरा कागज़ सा है,
प्रियतम के नेह है रंग सभी,
हर कोना रंग भर जाएगा,
जो साथ भरेंगे रंग कभी।

दो जीवन का ये विलय सदा,
अनुभूति का आधार बने,
हो अक्ष-अक्षिका सा तालमेल,
और मधुर मधुर संसार बने।


Picture Courtesy: http://images2.layoutsparks.com

15 comments:

  1. ऐसे मधुर शब्द पढ़कर आत्मा भी रस स्निग्ध हो जाता है है मधुरेश भाई. प्रेममय इस रचना के लिए बहुत-बहुत बधाई!

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  2. सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - 4 . 8 . 2014 को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  3. वाह ... अनुपम शब्‍द संयोजन ....
    शुभकामनाएँ

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  4. बहुत ही मधुर गीत ... अनुपम ...

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  5. दिल से लिखी गयी और दिल पर असर करने वाली रचना...!!!

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  6. बहुत बढ़िया ..पहली बार आपके ब्लॉग पर आई हूँ ...अच्छा लगा

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  7. बहुत सुन्दर भावमयी रचना...

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  8. बहुत ही मधुर, सुन्दर रचना...

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  9. बहुत सुन्दर रचना, बधाई.

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  10. दो जीवन का ये विलय सदा,
    अनुभूति का आधार बने,
    हो अक्ष-अक्षिका सा तालमेल,
    और मधुर मधुर संसार बने। .....आपकी रचना काफी अच्छी लगी।मेरे नए पोस्ट पर आपकी प्रतीक्षा रहेगी।

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