Saturday, April 13, 2013

लाइफ का हैंग-ओवर



जीवन का मदिरालय प्यारा,
भांति-भांति से भरता प्याला,
रंग हो चाहे जो हाले का,
नशा सभी ने जम के पाला। 

ज्यों ही एक नशे की सरिता
करे पार, हो जाए किनारा,
त्यों ही दूजी सरिता आकर
मिल जाए, बह जाए किनारा।

हर पग रुकता, थमता-झुकता,
फिर भी आगे बढ़ता रहता,
कौन नशा जीवन से बढ़कर-
डगमग में भी स्वयं संभलता!

हर निशा में एक मधु है,
हर तम लाती एक नशा है,
हो अधीर फिर भी है पीता,
भूले स्मृति-उसकी मंशा है।

लेकिन भूल कहाँ पाता है!
स्मृतियाँ फिर भी आती हैं। 
और नशे में नित-नित नव-नव
श्रृंखलाएं बनती जाती हैं।

मगर अंत में एक प्रकाश फिर 
अंतस उज्जवल कर जाता है,
बड़े जतन से जाते जाते
ही लाइफ का हैंग-ओवर जाता है!

Picture Courtesy: Priyadarshi Ranjan

31 comments:

  1. बहुत खूबसूरती से शब्द और भाव बुने हैं आपने मधुरेश भाई. बधाई हो.जीवन के नशे का भी जवाब नहीं. कितनी बार मदमत्त होते है, कितनी बार हैंगओवर होता है और कई बार नशा चढ़ ही नहीं पाता है(लेवेल ज्यादा हो तो :) )

    जीवन का मदिरालय प्यारा,
    भांति-भांति से भरता प्याला,
    रंग हो चाहे जो हाले का,
    नशा सभी ने जम के पाला।

    बिलकुल सच लिखा है. ये जीवन है तो रंग देख पाते हैं. मगर चश्म साकी की हो तो देखिये जिगर मुरादाबादी साब क्या कहते है- :)

    वही सहबा है, वही सागर है वही पैमाना है
    चश्म-साकी है कि मयखाने का मयखाना है

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  2. क्या बात कही मधुरेश....
    जीवन का नशा है ही ऐसा...बस कोई सुन्दर साथ हो पीने वाला तो धुत रहें सब..हमारी बला से...

    सस्नेह
    अनु

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  3. सुन्दर अभिव्यक्ति..बहुत सुंदर कविता ..

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  4. जिन्दगी ही एक नशा है..बहुत सुंदर कविता ..शुभकामनाएं मधुरेश..

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  5. हर निशा में एक मधु है,
    हर तम लाती एक नशा है,
    हो अधीर फिर भी है पीता,
    भूले स्मृति-उसकी मंशा है।

    सुंदर विचार, सुंदर प्रस्तुति.

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  6. जिंदगी में कई नशा है, जीने की नशा सबसे प्रभावशाली है

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  7. अति- मनोहर रचना I बहुत खूब II

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  8. लेकिन भूल कहाँ पाता है!
    स्मृतियाँ फिर भी आती हैं।
    और नशे में नित-नित नव-नव
    श्रृंखलाएं बनती जाती हैं।
    जीने की राह आसान हो जाती है ...।
    रचना एक खूबसूरत पैगाम दे रही
    शुभकामनायें !

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  9. क्या लाइफ का हैंगओवर कभी जाता है...!!!!

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  10. लेकिन भूल कहाँ पाता है!
    स्मृतियाँ फिर भी आती हैं।
    और नशे में नित-नित नव-नव
    श्रृंखलाएं बनती जाती हैं।,,,,
    जीवन को जीना भी एक नशा है ,आभार

    Recent Post : अमन के लिए.

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  11. जीवन एक मदिरालय ही तो है,बेहतरीन रचना.

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  12. बहुत सुन्दर....बेहतरीन प्रस्तुति!!!
    पधारें "आँसुओं के मोती"

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  13. .बहुत सुंदर कविता .......... मगर अंत में एक प्रकाश फिर
    अंतस उज्जवल कर जाता है,....................

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  14. मदहोश कर देने वाली
    सुंदर रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

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  15. डूबें रहें, जीते रहे..... सुंदर लिखा है

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  16. आज 15/04/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की गयी हैं. आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  17. क्या बात है बहुत ही सुन्दर कुछ यूँ लगा की बच्चन साहब की मधुशाला हो जैसे ।

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  18. हर पग रुकता, थमता-झुकता,
    फिर भी आगे बढ़ता रहता,
    कौन नशा जीवन से बढ़कर-
    डगमग में भी स्वयं संभलता!
    ज़िन्दगी में कई नशे होतें है ,सब का अपना अपना खुमार होता है ,कब भूलता है, कब थामता है ,कब थमता है इसका अंदाज नहीं लग पता.सच ज़िन्दगी ही एक नशा है.
    सुन्दर रचना

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  19. यूँ तो सभी छंद बहुत भावपूर्ण और प्रभावशाली, लेकिन यह सबसे ज्यादा पसंद आया...

    हर पग रुकता, थमता-झुकता,
    फिर भी आगे बढ़ता रहता,
    कौन नशा जीवन से बढ़कर-
    डगमग में भी स्वयं संभलता!

    लाइफ का हैंग ओवर उसी दिन जिस दिन अंतिम साँस... यही सच है, सभी जीवन का. उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई.

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  20. बहुत बढ़िया..जीना भी किसी नशे से कम नहीं ...

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  21. हर पग रुकता, थमता-झुकता,
    फिर भी आगे बढ़ता रहता,
    कौन नशा जीवन से बढ़कर-
    डगमग में भी स्वयं संभलता .... और दिखाता मधुशाला

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  22. बहुत सुन्दर!
    http://voice-brijesh.blogspot.com

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  23. This line stands out, 'कौन नशा जीवन से बढ़कर'

    Lovely read.

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  24. बहुत सुन्दर लेखन |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  25. बहुत सुंदर प्रस्तुति......

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  26. हर निशा में एक मधु है,
    हर तम लाती एक नशा है,
    हो अधीर फिर भी है पीता,
    भूले स्मृति-उसकी मंशा है।

    बहुत बढ़िया लेखन

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  27. 'बड़े जतन से जाते जाते
    ही लाइफ का हैंग-ओवर जाता है!'

    well said!

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  28. पिछले २ सालों की तरह इस साल भी ब्लॉग बुलेटिन पर रश्मि प्रभा जी प्रस्तुत कर रही है अवलोकन २०१३ !!
    कई भागो में छपने वाली इस ख़ास बुलेटिन के अंतर्गत आपको सन २०१३ की कुछ चुनिन्दा पोस्टो को दोबारा पढने का मौका मिलेगा !
    ब्लॉग बुलेटिन के इस खास संस्करण के अंतर्गत आज की बुलेटिन प्रतिभाओं की कमी नहीं (27) मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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