Monday, December 24, 2012

विनती



यह दीन दशा अब देख देश की,
रोती  प्याला, रोती हाला।
चहु ओर व्यथा है, औ' विषाद है,
थर-थर काँपे मन-साक़ी बाला।

कैसी मादकता छा गयी समाज में!
किसने ढारी यह कलुषित हाला!
निःशब्द खड़ी, नियति पे रोती,
बस शोक मनाती मधुशाला।

कुछ पुष्प ईश-अर्पण के तुम,
श्रद्धा से परे हटा देना,
विनती उस बाला की करना,
बनी रहे उसकी मधुशाला।


Dedicated to that brave girl who is still struggling for life in Safdarjung Hospital. 
May God give her immense strength to recover soon. Amen. 

16 comments:

  1. निःशब्द खड़ी, नियति पे रोती,
    बस शोक मनाती मधुशाला।
    शब्दातीत अभिव्यक्ति.... बेहद प्रभावपूर्ण!

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  2. निःशब्द खड़ी, नियति पे रोती,
    बस शोक मनाती मधुशाला।
    शब्द शब्द से पीड़ा झलक रही है .....आपकी प्रार्थना में मेरे भी स्वर शामिल हों ....!!

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  3. तोड़ दिया कर में ले कर उसके अरमानो का प्याला
    बिखर गयी चहुं ओर दिशा उसके जीवन की हाला
    हर चौराहे पर खड़े हुये सब बन उसकी साकीबाला
    न्याय मांगते कहते हैं सब बनी रहे यह मधुशाला ।

    अच्छी प्रस्तुति

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  4. मन के भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने....

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  5. कैसी मादकता छा गयी समाज में!
    किसने ढारी यह कलुषित हाला!
    निःशब्द खड़ी, नियति पे रोती,
    बस शोक मनाती मधुशाला,,,,,बेहतरीन भावपूर्ण पंक्तियाँ,,

    recent post : समाधान समस्याओं का,

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  6. निःशब्द खड़ी, नियति पे रोती,
    बस शोक मनाती मधुशाला।
    बहुत सुन्दर भाव पूर्ण अभिव्यक्ति
    नई पोस्ट : "सास भी कभी बहू थी " , "गांधारी के राज में नारी "

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  7. कुछ पुष्प ईश-अर्पण के तुम,
    श्रद्धा से परे हटा देना,
    विनती उस बाला की करना,
    बनी रहे उसकी मधुशाला।...भावपूर्ण!!

    जंग जिन्दगी से लड़ रही कहला रही बहादुर
    राष्ट्र की लाडली निर्भया तुम दुआएँ ले लो हमारी

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  8. यही विनती की सबसे पहले वो स्वस्थ हो जाए.

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  9. सार्थक ... बहुत ही सामयिक प्रस्तुति ..

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  10. वाह ......बहुत ही ज़बरदस्त।

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  11. बहुत कुछ बयाँ करती चंद पंक्तियाँ !!

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  12. कैसी मादकता छा गयी समाज मे।
    किसने ढारी यह कलुषित हाला।
    इसके जरिये आपने बहुए कुछ कह डाला।
    मन बाग बाग झाला।
    सार्थक प्र्स्तुति हार्दिक आभार
    उमाशंकर चौहान

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