Friday, August 24, 2012

कुछ बूँदें ओस की...



दो नयना भरे-भरे से हैं
स्नेह से, आशाओं से...
जाने क्यूँ परे-परे से हैं
अनदेखी परिभाषाओं से...

मुख पे मद्धिम मुस्कान कहीं
इक स्वप्न कोई पुलकित करतीं...
कुछ डूबे से, कुछ उबरे से
मीठे ख़याल अंकित करतीं...

हाँ दूर कहीं उन स्वपनों में
नव-जीवन की आवृत्ति है...
जो था सुषुप्त, अब है जगा
मन नवल-रूप आकृति है...

सोचूं तो सबकुछ है मन में,
कितनी गहरी संतृप्ति है...
बस नेह भरा ही मन मेरा
प्रारब्ध है, स्मृति है...

35 comments:

  1. बहुत सुन्दर !!

    ReplyDelete
  2. सोचूं तो सबकुछ है मन में,
    कितनी गहरी संतृप्ति है...
    बस नेह भरा ही मन मेरा
    प्रारब्ध है, स्मृति है...
    वाह ... बेहतरीन

    ReplyDelete
  3. हाँ दूर कहीं उन सपनों में
    नव-जीवन की आवृत्ति है...
    जो था सुषुप्त, अब है जगा
    मन नवल-रूप आकृति है,,,,बहुत बढ़िया भावपूर्ण रचना,,,,,मधुरेश जी

    RECENT POST ...: जिला अनूपपुर अपना,,,

    ReplyDelete
  4. सोचूं तो सबकुछ है मन में,
    कितनी गहरी संतृप्ति है...

    गहन और भाव्पूर्ण रचना ..!!
    शुभकामनायें मधुरेश ...!!

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर कोमल
    भाव अभिव्यक्ति...
    :-)

    ReplyDelete
  6. खुबसूरत अभिवयक्ति......

    ReplyDelete

  7. सोचूं तो सबकुछ है मन में,
    कितनी गहरी संतृप्ति है...
    बस नेह भरा ही मन मेरा
    प्रारब्ध है, स्मृति है...... शब्द शब्द मरीं अदभुत भावों का प्रवाह है

    ReplyDelete
  8. सुन्दर भावाभिव्यक्ति!

    ReplyDelete
  9. सुन्दर भावो के साथ सुन्दर शब्दों का संयोजन

    ReplyDelete
  10. सुंदर भावाभिव्यक्ति.....

    ReplyDelete
  11. सुदर भाव के साथ सुंदर गीत। बहुत अच्छी पोस्ट। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है।

    ReplyDelete
  12. अति सुन्दर भाव व अभिव्यक्ति .. अच्छी लगी..

    ReplyDelete
  13. हिंदी में लेखन बहुत सुन्दर है आपका।

    ReplyDelete
  14. कल 26/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  15. सुंदर भाव पूर्ण गीत।

    ReplyDelete
  16. Come and join the writers group... :)

    http://www.facebook.com/?ref=tn_tnmn#!/groups/424971574219946/

    ReplyDelete
  17. Very beautiful, I feel I can write a poem just after reading your posts. You inspire me :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thanks Saru! :) ... don't know if I really deserve such a compliment, but it is an honor to hear this from you!

      Delete
    2. Seriously, you deserve it and I learn a lot from writers like you. It's a pleasure knowing you. When you are connected to a good writer and person, you evolve each day.

      Delete
  18. बहुत खूब ,सुंदर ख्याल

    ReplyDelete
  19. सोचूं तो सबकुछ है मन में,
    कितनी गहरी संतृप्ति है...
    बस नेह भरा ही मन मेरा
    प्रारब्ध है, स्मृति है...

    वाह ... मधुर स्मृतियों को संजोय ... सुन्दर गीत ...

    ReplyDelete
  20. सोचूं तो सबकुछ है मन में,
    कितनी गहरी संतृप्ति है...
    बस नेह भरा ही मन मेरा
    प्रारब्ध है, स्मृति है...

    ....बहुत गहन और भावमयी प्रस्तुति...बहुत सुन्दर...

    ReplyDelete
  21. बहुत गहरे भाव

    ReplyDelete
  22. बहुत सुन्दर, मनभावन और गहन भाव...

    सोचूं तो सबकुछ है मन में,
    कितनी गहरी संतृप्ति है...
    बस नेह भरा ही मन मेरा
    प्रारब्ध है, स्मृति है...

    बधाई और शुभकामनाएँ.

    ReplyDelete
  23. सोचूं तो सबकुछ है मन में,
    कितनी गहरी संतृप्ति है...
    बस नेह भरा ही मन मेरा
    प्रारब्ध है, स्मृति है....wah.....kya baat kah di......

    ReplyDelete
  24. bahut gahan bhao, badhai

    mere blog me bhi padhare: http://kpk-vichar.blogspot.in

    ReplyDelete
  25. Beautiful lines.
    Beautifully expressed! :)

    ReplyDelete
  26. सोचूं तो सबकुछ है मन में,
    कितनी गहरी संतृप्ति है...
    बस नेह भरा ही मन मेरा
    प्रारब्ध है, स्मृति है...
    बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ .....

    ReplyDelete