Tuesday, May 25, 2010

पूर्णमासी



एक आँख में काजल,
दूसरे में बादल
छाए हुए हैं,
कहाँ उदासी है?
घेरे में टूट रहा है
'चाँद' का दम,
और सभी समझते हैं,
आज पूर्णमासी है.

This is not my composition, it is my dad's, who has always been a great source of inspiration for me.

Tuesday, February 23, 2010

ओ तन्हाई


ओ तन्हाई,
मुझसे बातें कर.

दिल का कोई कोना,
कहीं रो रहा है.
सूझता न कुछ, जाने
क्या हो रहा है?
पास आ ज़रा,
अब तो ना मुकर.
ओ तन्हाई,
मुझसे बातें कर.

राह में देखे हैं मैंने
सैकड़ों उल्फत-दगा.
छोड़ सपनों के उड़ान,
अब मन जगा.
हाथ ले तू थाम,
देखता है किधर?
ओ तन्हाई,
मुझसे बातें कर.


बाँध ले मुझको,
कहीं ना छूट जाऊं.
जोड़ दे हिम्मत,
कहीं ना टूट जाऊं.
खुद पे खामोशी का,
ऐसा हो असर!
ओ तन्हाई,
मुझसे बातें कर.

Picture courtsey: http://www.randyyork.net/7182.html

Tuesday, February 16, 2010

अमृत और विष


अमृत और विष
इस धरा पर,
साथ साथ मिलते हैं.
किसने कहा कि उसे
खुशियाँ ही न मिली?
और कौन है यहाँ जो
ग़म में न डूबा हो?
यहाँ पर हर मुस्कान
आंसू कि धारा में बहती है.
और हर दर्द में
एक ख़ुशी छिपी होती है.

Picture Courtesy: http://melissaayr.com/tag/abstract/