Madhushaalaa: The Nectar House
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Saturday, April 23, 2011
इस पार प्रिये बस यादें हैं
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एक सूनापन, एक खालीपन बेनूर पड़ा मन का दर्पण. उस पार तो हर क्षण जीवन था, इस पार वही नीरस नर्तन. उस पार प्रिये रस था उर में, हर...
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Saturday, March 26, 2011
छोटी सी बात
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कौन सी समस्या है जिसका समाधान नहीं है! या कि हार के बाद जीतने का विधान नहीं है! बस इतना समझिये कि ज़िन्दगी आसान नहीं है. हर बात ...
3 comments:
Monday, March 7, 2011
एहसास
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"..रुकते रुकते चल पड़े मन, ऐसी आशाओं को हाला, और चलके रुक जाय जहाँ पर, वहीँ वहीँ हो मधुशाला!.." मैंने मंदिर मस्जि...
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