Madhushaalaa: The Nectar House
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ब्लॉग के बारे में दो शब्द
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दो शब्द खुद के बारे में
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Saturday, October 22, 2016
ओ वराभय!
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बहुत दिनों से ब्लॉग जगत से दूर रहा। बहुत 'मिस' भी करता रहा। शोध कार्य चरम पर था , अतः व्यस्तता बढ़ गयी। ईश्वर के कृपा से पीएचडी प...
23 comments:
Thursday, March 10, 2016
हे बुद्धिजीवीयों
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मनुस्मृति ही क्यों, तुम वेद-पुराण भी जला डालो, धर्म, शास्त्र, नीतियों को तुम हँसी में ही उड़ा डालो! वैसे भी इन्हे समझ पान...
8 comments:
Wednesday, August 5, 2015
जागो कर्मयोगी
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************************* "तम-प्रकाश से पूछता रहा मैं- कौन हूँ मैं, कहो कौन हूँ मैं ? सब कुछ में कुछ भी नहीं मैं, कुछ-कुछ म...
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