Madhushaalaa: The Nectar House
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Thursday, March 28, 2013
कौड़ियों के दाम भी न बिका
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पैसे की तंगी ने मजबूर किया मुझे खुद को बेच डालने को। तो निकल पड़ा मैं भी इस बाज़ार में अपना मोल लगाने को। खुद की खूबियाँ गिनी, खुद की ख...
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Thursday, March 21, 2013
मकां आसमां है तेरा
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ज़मीं पर है तू मगर मकां आसमां है तेरा, इन पैरों को पर बनने की ख्वाहिश तो दे ज़रा। ये हकीक़त जो है, सपनों से सजा ही तो है, नींद...
14 comments:
Wednesday, February 27, 2013
अब रात कहाँ आती है यहाँ!
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इक दौर मुक़म्मल होता था सच-झूठ का, जीत-हार का, इक दौर था जीने-मरने का, इक दौर था नफरत-प्यार का. अब तो जीते जो हारा है, सच से अब झू...
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