Madhushaalaa: The Nectar House
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Thursday, December 27, 2012
मानसिकता में बदलाव
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नियमों को बदलने से क्या होगा, जब नियत ही न बदल पाई हो? बात आसमां में उड़ने की क्या हो, जब ज़मीं पर ही न संभल पाई हो! बड़ी ब...
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Monday, December 24, 2012
विनती
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यह दीन दशा अब देख देश की, रोती प्याला, रोती हाला। चहु ओर व्यथा है, औ' विषाद है, थर-थर काँपे मन-साक़ी बाला। कैसी मादकता छा गयी...
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Saturday, November 24, 2012
सागर की कशमकश
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नदियों का प्रेम समर्पण का, उनका तो प्रेम प्रवाह है बस। आग़ोश में लेता जाता फिर भी, सागर की है कुछ कशमकश! अथाह प्रेम समर्पण का नदिय...
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