Madhushaalaa: The Nectar House
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Saturday, December 31, 2011
जली रोटियां
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एक ग़रीब दंपत्ति थी, सीमित उनकी संपत्ति थी. कुछ कपड़े, इक झोपड़ था, थोड़े अनाज, थोड़ा जड़ था. एक जाड़े की बात थी, होने चली अब रात थी....
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Thursday, December 29, 2011
मैं ज़रा-सा धीर धर लूँ
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छंद यूँ काफी नहीं, है रात भी बाकी अभी, वक़्त भी ठहरा हुआ है, मैं ज़रा-सा धीर धर लूँ. मुझसे तुम ना अलग कहीं! मैं पर हूँ तुम विहग व...
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Sunday, December 18, 2011
मैं खुद से बातें करता हूँ!
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कभी न्यारी-सी प्यारी बातें, कभी विचारों से भरी बातें, उर के भीतर एक द्वंद्व मैं अनायास ही लड़ता हूँ! मैं खुद से ...
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