Madhushaalaa: The Nectar House
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दो शब्द खुद के बारे में
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Sunday, December 12, 2010
किसी की सिसकियों में खुद को तलाश लें
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कितनी अनुपम ये सृष्टि है! पर छोटी अपनी दृष्टि है. कहीं हैं भोर कहीं सांझ हैं, कहीं अति कहीं अनावृष्टि है. कहीं कलकल बहता विलास ह...
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Tuesday, December 7, 2010
अंतर्मन
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उडती है, मन के आकाश में तू उन्मुक्त विचार सी. दुःख में धैर्य, सुख में सखी, तू जीवन आधार सी. तू अनादि, अनंत, अजीर्ण पतझड़ में बहार...
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Saturday, November 27, 2010
भक्ति गीत - भोजपुरी में
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पतझड़ के सूखा पत्ता हरिअर बना द~~ हमरो अन्दर तनी-सा भक्ति जगा द~~ --२ तू ही एक प्यारा बाड़ा~ तू ही एक दुलारा बाड़ा~ डूबल बा नाव हमार...
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