Madhushaalaa: The Nectar House
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Wednesday, October 27, 2010
सजल आँखें
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सपनें जहाँ बसते थे, अरमान जहाँ जगते थे, बयां करती थी जो हर पल दिल के उमंगों को, वो आज यूँ ख़ामोश हैं जैसे फूल हो खिज़ा के. त...
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प्रिय तुम यूँही
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प्रिय तुम यूँही दीपक सा बन, प्राणों को उजियारा रखना, प्रेम-नदी में खुद को एक औ' मुझको एक किनारा रखना. जब होते तुम पास हमा...
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Wednesday, September 22, 2010
बढ़ता रह निरंतर
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तू प्रगति पथ पर, बढ़ता रह निरंतर. सरिता की भांति पीछे छोड़ता चल राह के चट्टान पत्थर, बढ़ता रह निरंतर. झील की भांति सीमित रखा कर अ...
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