Madhushaalaa: The Nectar House
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Tuesday, May 25, 2010
पूर्णमासी
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एक आँख में काजल, दूसरे में बादल छाए हुए हैं, कहाँ उदासी है? घेरे में टूट रहा है 'चाँद' का दम, और सभी समझते हैं, आज पूर्ण...
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Tuesday, February 23, 2010
ओ तन्हाई
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ओ तन्हाई, मुझसे बातें कर. दिल का कोई कोना, कहीं रो रहा है. सूझता न कुछ, जाने क्या हो रहा है? पास आ ज़रा, अब तो ना मुकर. ओ तन्हा...
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Tuesday, February 16, 2010
अमृत और विष
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अमृत और विष इस धरा पर, साथ साथ मिलते हैं. किसने कहा कि उसे खुशियाँ ही न मिली? और कौन है यहाँ जो ग़म में न डूबा हो? यहाँ पर हर मुस...
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