Madhushaalaa: The Nectar House
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Monday, May 4, 2009
समय
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समय हँसता है मुस्कुराता है चीखता है चिल्लाता है रूठता है मनाता है लेकिन कभी शांत नही रहता चुप नही बैठता क्यूंकि समय हमें यही तो ...
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Saturday, May 2, 2009
सप्तपर्णा से चार पत्ते
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१) जीवन असमंजस का प्याला, तम-प्रकाश की मिश्रित हाला. सबल विवेक, निर्बल विकार हों आशाएं मेरी मधुशाला! २) ओ छल-साकी मत पिला अब ...
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