Saturday, March 26, 2011

छोटी सी बात


कौन सी समस्या है जिसका समाधान नहीं है!
या कि हार के बाद जीतने का विधान नहीं है!
बस इतना समझिये कि ज़िन्दगी आसान नहीं है.
हर बात मुमकिन है वहां, जहां अभिमान नहीं है.


Monday, March 7, 2011

एहसास


"..रुकते रुकते चल पड़े मन,
ऐसी आशाओं को हाला,
और चलके रुक जाय जहाँ पर,
वहीँ वहीँ हो मधुशाला!.."

मैंने मंदिर मस्जिद जाकर
ढूँढा प्याला, ढूंढी हाला
सन्मुख बैठा संत जनों के,
नहीं सधा मन मतवाला.
जब भी तेरा ध्यान लगाया
भूला, भटका, भरमाया.
अब जा के एहसास हुआ कि
कहाँ नहीं है मधुशाला!

Monday, February 28, 2011

चाय


चाय की अलग ही बात है!
चाहत इसकी बड़ी निराली.
शाम पकोड़े संग हो,
या सुबह की गरम प्याली.
ये स्वागत-सत्कार
का है मुख्य आधार.
हिंदी हो या चीनी,
पिए सारा संसार.
कोई अगर घर आये,
तब इतना तो निभायिये,
कहिये - 'ज़रा बैठिये,
चाय तो पीते जाईये'.
इज्ज़त बनाने में,
या फिर उतारने में,
इसके बराबर का
न और कोई दूजा.
ग़र न पिलाई चाय,
तो कहेंगे यार
कि 'कमबख्त ने
चाय तक नहीं पूछा!'
चाय है गपशप का,
सबसे बड़ा बहाना .
चाय है उपाय,
जब सुस्ती हो भगाना .
भाई मेरी न मानिए,
खुद की न मानिए,
मगर इसका महत्व,
ज़रा उनसे पहचानिए,
जो करते हैं  PhD ,
काम जिनका 'खीर टेढ़ी'.
फिर भी कितनी तन्मयता से
ये 'चाय-धर्म' निभाते हैं!
दिन में दो-चार बार
चाय पीने ज़रूर जाते हैं.