काश कि इस दिल में
इक दरवाज़ा होता,
जिसे खोल देता मैं
और जी भर के भर लेता
इन उजालों को.
काश कि ख्वाबों की भी
कोई हार्ड डिस्क होती,
और स्टोर कर लेता मैं
इन लम्हों के
नायाब ख़यालों को.
काश कि इन पलों को
थमने की सहूलियत होती,
और अंतर के संगीत पर
थिरकता ये सुरमयी मन
ले जाता पराकाष्ठा पर
उमंग भरे तालों को.
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