कभी न्यारी-सी प्यारी बातें,
कभी विचारों से भरी बातें,
उर के भीतर एक द्वंद्व मैं
अनायास ही लड़ता हूँ!
मैं खुद से बातें करता हूँ!
खुद को ही दो टुकड़ों में कर
खुद ही कहता, खुद सुनता हूँ.
कोलाहल में सामंजस्य का
नव नित रूप मैं गढ़ता हूँ.
मैं खुद से बातें करता हूँ!
स्व-चिंतन ही आत्मबोध है,
अंतर-मनन सर्वोत्तम शोध है,
मन के गागर को मैं नित नित
गंगा-जमुना से भरता हूँ.
मैं खुद से बातें करता हूँ!
Picture Courtesy: Santanu Sinha


