Wednesday, February 16, 2011

क्या तुम-सा कोई और कहीं है?




तुम हो जैसे शहद सुमन में.
पारिजात किसी कानन में.
या पावन अभिलाषा कोई
किसी मनीषि के साधन में.
गीत नया है, रीत नयी है.
क्या तुम-सा कोई और कहीं है?


तुम्हे देख मन खिल जाता है,
अपने बिम्ब से मिल जाता है.
जब भी तुम सन्मुख होती हो,
अंतर्मन निखिल पाता है.
तुम हो जहां, बहार वहीँ है.
क्या तुम-सा कोई और कहीं है?


मीठी-प्यारी तुम्हारी बातें,
रोम-रोम पुलकित कर जाती.
इक मधुर मुस्कान तुम्हारी
बुझता मन जीवित कर जाती.
तुम-सा सानी कहीं नहीं है.
क्या तुम-सा कोई और कहीं है?


Picture: A shot taken in Kem Sentosa (Malaysia)


For my hypothetical girlfriend, jo hai, kahin na kahin! :)

Saturday, January 29, 2011

वसंत




झड़ते-बिखरते,
सूखे पीले पत्ते.
नव-आवरण को
वृक्ष तरसते.
सब्र करो, उग आयेंगे
फिर से हरे पत्ते!

चिड़ियों की चहक से
चहकती-सी दुनिया.
फूलों की खुशबू से
महकती-सी दुनिया.
कई छोड़ चले, कई आएंगे
फिर से चमकते दमकते!
 
क्यूँ हो मन में
विरह का क्षोभ?
क्यूँ पाले कोई
मिलन का लोभ?
कहती नियति- ढल जायेंगे
यूँही मिलते-बिछड़ते!
Picture Courstey: Mark Schellhase http://commons.wikimedia.org/wiki/User:Mschel

Dedicated to my close-to-heart friends Saurabh, Srishti and Vishal-  you make the spring of my life...

Saturday, January 1, 2011

गीत नया गुनगुना ऐ मन



गीत नया गुनगुना ऐ मन.
दिल के तार बजे छन-छन.
तोड़ के सारे कुपित बंधन,
उन्मुक्त छिड़े सौरभ मन-उपवन!

देखो गाता मंद-समीर यह,
देखो झूम रहा है कण-कण.
प्रेम-माधुर्य को कर आलिंगन,
वर्ष है आया यह नव-नूतन.

कोई दिल की बात छुपे ना,
शब्द पिरो ले जैसे दर्पण.
और झूमे इनके संगीत में,
स्नेह-विभोर अपना यह जीवन.


Dedidated to Swarn Di, who has always been so inspiring for me!